Sai Baba Vrat Katha PDF in Hindi: साईं बाबा की व्रत कथा और आरती, पूजा विधि

Sai Baba Vrat Katha PDF in Hindi: साईं बाबा की व्रत कथा और आरती, पूजा विधि

Shirdi Sai Baba is a prominent place for many devotees who follow them and go to their temple. Shree Sai Baba is a great example of mercy and forgiveness. If you are also a devotee of Sai Baba then you should observe a Vrat. This Vrat can be observed by any man, woman, and child. All you have to avoid eating after the promise of fast and read the entire story of Sai Baba. If you are sick, or old then you can avoid this Vrat. Your faith is more important than fasting the entire day. Here we will share the direct link to download the Sai Baba Vrat Katha PDF in Hindi through this article below.

Sai Baba Vrat Katha PDF in Hindi

It does not matter of your religion is. You can observe Sai Baba Vrat despite your caste, religion, or community. Only morning or evening Sai Baba is worshipped. Kept a picture of Sai Baba before you. You have to wear yellow clean clothes. Now apply Tilak of sandalwood and kumkum should be applied on Sai Baba. Yellow follows should be offered. Many devotees get the result of this fast and get a positive lifestyle and their desire. Their wishes were completed after this Vrat. You have to show your faith and Sai Baba will help you. In the below table, we will upload the scanned copy of the Sai Baba Vrat Katha PDF so that you can easily download it. साईं बाबा की व्रत कथा और आरती, पूजा विधि is very easy to observe.

साईं बाबा की व्रत कथा PDF Download – Overview

PDF Name Sai Baba Vrat Katha
In Hindi साईं बाबा की व्रत कथा और आरती, पूजा विधि
Pages 2
Size 56 kb
PDF Download Sai Baba Vrat Katha PDF in Hindi

साई बाबा आरती हिंदी PDF

Category Religious Text

साईं बाबा की व्रत कथा (हिंदी में)

किरन बहन और उनके पति किशन भाई एक शहर में रहते थे। वैसे तो दोनों का एक दूसरे के प्रति गहरा प्रेम भाव था। परन्तु किशन भाई का स्वरूप झगड़ालू था। अड़ोसी-पड़ोसी भी उनके स्वभाव से परेशान थे, लेकिन किरन बहन धार्मिक स्वभाव की थी, भगवान पर विश्वास रखती एवं बिना कुछ कहे सब कुछ सह लेती थी। धीरे-धीरे उनके पति का रोजगार ठप हो गया। कुछ भी कमाई न होती थी।

अब किशन भाई दिन भर घर पर ही रहते। घर में पड़े-पड़े उनका स्वभाव चिड़चिड़ा हो गया। एक दिन दोपहर को एक वृद्ध दरवाजे पर आकर खड़ा हो गया। चेहरे पर गजब का तेज था, आकर वृद्ध ने दाल चावल की मांग की। किरन बहन ने दाल चावल दिए और दोनों हाथों से उस वृद्ध को नमस्कार किया। वृद्ध ने कहा, साईं सुखी रखे। किरन बहन ने कहा कि महाराज सुख किस्मत में नहीं है। फिर मिलेगा कैसे? ऐसा कहकर उन्होंने अपने दुःखी जीवन का वर्णन किया।

वृद्ध ने श्री साईं बाबा की व्रत कथा (Sai Baba Vrat Katha) के बारे में बताते हुए कहा – नौ गुरुवार फलाहार या एक समय का भोजन करना। हो सके तो बेटा सांई मंदिर जाना, घर पर साईं बाबा की नौ गुरुवार पूजा करना, साईं व्रत करना, आरती पढ़ना और विधिपूर्वक उद्यापन करना। भूखे को भोजन देना। साईं व्रत के बारे में लोगों को यथाशक्ति बताना। इस तरह साईं व्रत का प्रचार करना। साईं बाबा तेरी सभी मनोकामना पूर्ण करेंगे। यह व्रत कलयुग में बड़ा चमत्कारिक है। यह सभी की मनोकामना पूर्ण करता है। लेकिन साईं बाबा पर अटूट श्रद्धा रखना जरूरी है। धीरज रखना चाहिये। जो इस विधि से साईं बाबा की व्रत कथा और आरती पढ़ेगा, बाबा उसकी सभी मनोकामना जरूर पूर्ण करेंगे।

किरन बहन ने भी गुरुवार का व्रत किया। नौवें गुरुवार को ग़रीबों को भोजन कराया। सांई व्रत के बारे में औरों को बताया। उनके घर के झगड़े दूर हुए और सुख-शान्ति हो गई जैसे किशन भाई का स्वभाव ही बदल गया हो। उनका रोजगार फिर से चालू हो गया। थोड़े समय में ही सुख समृद्धि बढ़ गयी।

अब दोनों पति-पत्नी सुखी जीवन बिताने लगे। एक दिन किरन बहन के जेठ-जेठानी आये और बातों ही बातों में उन्होंने बताया की उनके बच्चे पढ़ाई नहीं करते। परीक्षा में फेल हो गये हैं किरन बहन ने नौ गुरुवार की महिमा बताई और कहा कि साईं बाबा की भक्ति से बच्चे अच्छी तरह अभ्यास कर पाएंगे। लेकिन इसके लिए सांई बाबा पर विश्वास रखना जरूरी है। वे सबकी सहायता करते हैं। उनकी जेठानी ने व्रत की विधि पूछी, तो किरन बहन ने कहा कि नौ गुरुवार फलाहार करके अथवा एक समय भोजन करके यह व्रत किया जा सकता है और नौ गुरुवार हो सके तो साईं दर्शन के लिए मंदिर जाने को कहा। साथ ही यह कहा कि–

  • यह व्रत स्त्री-पुरुष या बच्चे कोई भी कर सकता है। नौ गुरुवार साईं तस्वीर की पूजा करना।
  • फूल चढ़ाना, दीपक अगरबत्ती आदि करना। प्रसाद चढ़ाना एवं सांई बाबा का स्मरण करना, आरती करना आदि की विधि बताई। साईं व्रत कथा, सांई स्मरण, साईं चालीसा, आदि का पाठ करना।
  • नौवें गुरुवार को गरीबों को भोजन देना।
  • नौवें गुरूवार को सांई व्रत की जानकारी अपने सगे संबंधी, अड़ोसी पड़ोसी को देना।

सूरत से उनकी जेठानी का थोड़े दिनों बाद पत्र आया कि उनके बच्चे सांई व्रत करने लगे हैं और बहुत मन लगाकर पढ़ते हैं। उन्होंने भी व्रत किया था। इस बारे में उन्होंने लिखा की उनकी सहेली कोमल बहन की बेटी की शादी साईं बाबा की व्रत कथा और आरती (Sai Vrat Katha aur Aarti) पढ़ने से बहुत ही अच्छी जगह हो गई है। उनके पड़ोसी के गहनों का डिब्बा गुम हो गया था। वह सांई व्रत की महिमा के कारण दो महीने के बाद मिल गया ऐसा अद्भुत चमत्कार हुआ था। किरन बहन ने कहा कि साईं बाबा की महिमा महान है। यह जान लिया था कि साई बाबा जैसे आप लोगों पर प्रसन्न होते हैं। वैसे हम पर भी होना।

साई बाबा आरती हिंदी PDF

ॐ जय साईं हरे, बाबा शिरडी साईं हरे।
भक्तजनों के कारण, उनके कष्ट निवारण॥
शिरडी में अवतरे, ॐ जय साईं हरे॥ ॐ जय…॥

दुखियन के सब कष्टन काजे, शिरडी में प्रभु आप विराजे।
फूलों की गल माला राजे, कफनी, शैला सुन्दर साजे॥
कारज सब के करें, ॐ जय साईं हरे ॥ ॐ जय…॥

काकड़ आरत भक्तन गावें, गुरु शयन को चावड़ी जावें।
सब रोगों को उदी भगावे, गुरु फकीरा हमको भावे॥
भक्तन भक्ति करें, ॐ जय साईं हरे ॥ ॐ जय…॥

हिन्दु मुस्लिम सिक्ख इसाईं, बौद्ध जैन सब भाई भाई।
रक्षा करते बाबा साईं, शरण गहे जब द्वारिकामाई॥
अविरल धूनि जरे, ॐ जय साईं हरे ॥ ॐ जय…॥

भक्तों में प्रिय शामा भावे, हेमडजी से चरित लिखावे।
गुरुवार की संध्या आवे, शिव, साईं के दोहे गावे॥
अंखियन प्रेम झरे, ॐ जय साईं हरे ॥ ॐ जय…॥

ॐ जय साईं हरे, बाबा शिरडी साईं हरे।
शिरडी साईं हरे, बाबा ॐ जय साईं हरे॥

श्री सद्गुरु साईंनाथ महाराज की जय॥

Sai Baba Vrat पूजा विधि

You just need to follow a few simple rules of Sai Baba Vrat Katha. Below we have mentioned clearly;

  • On Thursday evening, take a bath and wear clean clothes.
  • Now stand up before the photo of Sai Baba and take a pledge of Vrat.
  • Remember that, only wear yellow color clothes.
  • Spread a yellow-colored cloth and install a photo of Sai Baba.
  • Now offer rice, yellow flowers, and Roli to Baba.
  • Light up the lamp and start to read the Katha.
  • You can offer Khichdi and yellow-colored sweets. Baba is very fond of eating Khichdi.
  • Now start performing Aarti.
  • After completing Aarti, distribute Prasad among all the people.
  • If you can donate food and clothes to the poor then do this.

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